Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
मया पश्यतु मामेष इति संकल्पितं तदा ।
तेन मां दृष्टवानेष स्वसंकल्पार्थभाजनम् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
यह जो सिद्ध था, वह %ी सत्यसकल्य तथा प्रिद्ध था. अतः मुझे देख सकता था, इस आशय
से उसमे विशेषता दिखलाते हैं /
हे श्रीरामचन्द्रजी उस समय मैंने यह सिद्ध मुझे देखे, ऐसा संकल्प किया था, इससे उस सिद्ध
ने मुझे देखा, जो स्वसंकल्पित अर्थका भाजन था