Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
जनो जरठभेदत्वान्न संकल्पार्थभाजनम् ।
स एष जीर्णभेदत्वात्सत्यकामत्वभाजनम् ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
साधारण लोगों की अपेक्षा सिद्ध पुरुष में विशेषता बतलाते हैं /
चिरकाल की वासना से जिस पुरुष का भेद बहुत दृढ़ हो चुका है, वह साधारण पुरुष चिरकाल
की वासना से भेदबुद्धि के दृढ़ होने के कारण संकल्पित अर्थ का भाजन नहीं होता, किन्तु
भेदवासना मिट जाने के कारण यह सिद्ध सत्य संकल्प का भाजन था