Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
अस्मदादिर्जनो नाम यथा संकल्पकल्पितान् ।
नासंकल्पितमाप्नोति सत्यकामवपुर्यतः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
सत्य ग्रंकल्पानुसारी दर्शन की व्यवस्था से श्रीवश्तिष्ठजी दोनों का परिहार करते हैं ।
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, हमारे सदृश ज्ञानयोगसिद्ध पुरुष जैसे संकल्प से
कल्पित पदार्थों का अवलोकन करता है, वैसे ही असंकल्पित पदार्थों को प्राप्त नहीं करता, क्योंकि
वह सत्यसंकल्प शरीरवाला है