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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 4

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

बद्धपद्मासनं शान्तं समाधाननिरिङ्गनम् । गुल्फद्वितयमध्यस्थवृषणं विषयातिगम् ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

उन्होने पद्मासन लगाया था । उनके सारे शरीर में शान्ति-ही-शान्ति भरी थी। समाधि द्वारा इच्छित ब्रह्मपद में चित्त के स्थिर हो जाने से उनका शरीर तनिक भी हिलता डुलता न था, उनके अण्डकोश दोनों एडियों के बीच में दबे थे तथा वे विषयों से परे थे