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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 90, Verse 8

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 90, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 90 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

यत्स्वप्नपुरमेवेदं सर्गादावेव चिन्नभः । अस्तितानास्तिते तत्र कीदृशे क्व कुतः स्थिते ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

इस रीति से जब दृश्यों में प्रतियोगी अस्तित्वका स्थान नहीं है, तब अस्तित्व के अभाव नास्तित्व का भी स्थान नहीं है, यह अनायास सिद्ध हो जाता है, यह कहते हैं। चूँकि सृष्टि के आदि में यानी सृष्टि के पूर्व चिदाकाश ही था, इसलिए सृष्टि के बाद चिदाकाश में देखा गया भी यह स्वप्ननगर के सदृश ही है, इसलिए उसमें अस्तित्व और नास्तित्व ही कैसे, कहाँ, किस हेतु से रह सकते हैं ?