Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 90, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 90, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 90 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
यथाहं दृष्टवांस्तानि जगन्त्यवनिरूपधृक् ।
तथा मया जलीभूय दृष्टं तादृशमेव तत् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामभद्र ने जो प्रश्न किया था, उसका उत्तर देकर अब जलःधारणा बॉधकर जो कुछ कौतुक
देखा था, उसको कहने के लिए भ्रूमिका बोधते हैं /
श्रीरामजी, जैसे मैंने पृथ्वी-धारणा से पृथ्वीरूप बनकर पूर्वोक्त जगत् देखे, वैसे ही जलधारणा
से जलरूप बनकर जल-जगत् देखा