Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 90, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 90, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 90 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
अनुभूतमपीदं सदहमित्यादिरूपकम् ।
नास्त्येव यदि वाप्यस्ति तद्ब्रह्माजमनामयम् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
राघव, यद्यपि यह
दृश्य सत् और अहम्" (मैं) इत्यादि रूपसे अनुभूत होता है, तथापि उसका अस्तित्व परमार्थदशा
मेँ है ही नहीं । यदि अस्तित्व है, तो वह अज निर्विकार ब्रह्मका ही है यानी जो कुछ भासता है वह
ब्रह्मरूप ही हे