Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 9, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 9, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 9 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
अचेतनं चेतनान्तश्चेतनादेव विद्यते ।
स्वेऽसादृश्येऽपि सदृशं पयोराशौ यथानलः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
नहीं हे, इससे कि अन्यत्र विषयों मेँ जाकर चैतन्य प्रदान कर सके । यदि वह चेतना सर्वगत मान ली
जाती है, तब तो हे विद्याधर, हमारी प्रतिज्ञा सिद्ध हो चुकी, यह तुम समझ लो