Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 87, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 87, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 87 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
तमालोक्य महाकल्पसंभ्रमं व्योमरूपिणा ।
भागेऽन्यत्र शरीरस्य संविदुन्मेषिता मया ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
उस सुवर्णशिला आदि में महाकल्प के संगम को देखकर
चिदाकाशस्वरूप मैंने शरीर के अन्य भाग में स्थित संवित् को सृष्ट देखने के संकल्प से कौतुकवश
उन्मेषित किया-जागृत किया