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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 87, Verse 6

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 87, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 87 · श्लोक 6

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

हदि चगोदयः इससे आपने (हृदय) पद से हृदयाकाश कहा है ओर आकाशरूपत: ' इससे मैने आपका अभिप्राय (विदाकाश' स्रमझा हैं, अपने इस मतलब को सम्बोधन द्वारा सूचित करते हुए श्रीरामचन्द्रजी भगवन, मेरे स्पष्ट परिज्ञान के लिए विस्तार के साथ आप पुन: इसका वर्णन कीजिये: यह ग्रार्थना करते है/ श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : परमाकाशरूप हे वसिष्ठजी, चिदाकाशरूप आपमें सृष्टि कैसे प्रवृत्त होती है, यह आप मुझसे फिर कहिये, ताकि इसका मुझे ठीक-ठीक परिज्ञान हो जाय