Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 85, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 85, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 85 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
स परः प्रकृतेः प्रोक्तः पुरुषः पवनाकृतिः ।
शिवरूपधरः शान्तः शरदाकाशशान्तिमान् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रसिद्ध जो शिवजी हैं, वे प्रकृति से पर पुरुष कहलाते है, पवनाकृति शिवरूप धरनेवाले पुरुष भी
वही है, वह शरद्काल के सदृश निर्मल शान्तिधारी एवं परम शान्त हैं