Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 85, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 85, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 85 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
सा राम प्रकृतिः प्रोक्ता शिवेच्छा पारमेश्वरी ।
जगन्मायेति विख्याता स्पन्दशक्तिरकृत्रिमा ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : श्रीरामजी, वह प्रकृति है, वह परमेश्वर
की इच्छारूप शक्ति है । शास्त्र मे विख्यात जगन्माया ओर स्वाभाविक स्पन्दशक्ति भी वही हे ।