Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 84, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 84, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 84 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
ज्योत्स्नायाश्चेत्यमेवं हि दृश्यमङ्गं चितेः क्रिया ।
शिवं शान्तमनायासमव्ययं विद्धि निर्मलम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
उस प्रकार उसका कालात्मक, जयतअंगवाला कियास्वरूपका वर्णन कर अब उसका वास्तविक
स्वरुप बतलाते हैं /
वास्तव में उसका स्वरूप शिव, शान्त, आयासरहित, अविनाशी एवं निर्मल है, यह आप
जानिये । उसमें तनिक भी निश्चलता या स्पन्दधर्मता नहीं है