Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 84, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 84, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 84 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
शिवत्वाव्यतिरेकेण शिवतैवं विदृश्यताम् ।
यथाङ्ग शून्यता व्योम्नः स्पन्दनं मातरिश्वनः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
अग्रो के न रहते भी व्यपदेश होने में दृष्टान्त देते हैं /
भद्र, जैसे आकाश का शून्यत्व है, वायु का स्पन्दन है, चन्द्रिकाका खिलनेवाला कुमुद आदि
अंग है, वैसे ही चिति का क्रिया एवं दृश्य अंग है