Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 83, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 83, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 83 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
वाच्यवाचकसंबन्धं विना बोधो न जायते ।
यस्मात्तस्मात्त्वयि मया दृष्टमेव प्रवर्णितम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
कल्पनादृष्टि से देखी गर वस्तु का वर्णन आपके सामने काच्य-काचककी यानी शब्द तथा अर्थ
की सम्बन्ध-कल्यना के बिना निर्विशेषका व्युत्पावन न हो सकने से ही मैंने उसकी कल्पना करके
आपको समञ्ाने के लिए किया है, यह कहते हैं /
हे श्रीरामचन्द्रजी, चूँकि वाच्यवाचक सम्बन्ध के बिना बोध नहीं होता, इसलिए कल्पनादृष्टि
से देखी गई वस्तु का ही मैंने आपसे वर्णन किया है