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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 83, Verse 7

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 83, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 83 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

यदेव वाच्युपारूढमेतद्राम सदैव ते । रूढाधिभौतिकदृशः क्षणान्मायात्मतां गतम् ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, चिरकाल के अभ्यास के कारण जगत्‌ में आपकी आधिभौतिक दृष्टि प्रौढ़ बन गई है, इसलिए आपकी वाणी में यह जो कुछ दृढ़ता को प्राप्त है वह सब क्षण भर में मायात्मता को यानी सत्यत्व की भ्रान्ति को प्राप्त हो जाता है । कहने का तात्पर्य यह है कि वह सब मायामात्र क्षणिक है, भ्रान्ति से सत्यरूप प्रतीत हो रहा है