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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 83, Verse 5

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 83, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 83 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

चिद्व्योमैव परं शून्यं संनिवेशेन तेन तत् । तथा संलक्ष्यते नाम भैरवाकारतां गतम् ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

केवल वह निराकार चिदाकाश ही उस आकार विशेष से भैरवाकारता को प्राप्त दिखाई देता है । सच पूछिये तो उस तरह का यथार्थ में कोई रूप आदि नहीं है, किन्तु उपासको की वासना के अनुसार भैरवाकारता को प्राप्त वह वैसा दीखता है