Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 82, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 82, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 82 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
किं नष्टं त्रिजगद्भूयः किं काल्या देहसंस्थितम् ।
परिनृत्यति निर्वाणं कथं पुनरुपागतम् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
तीनों जगत् का नष्ट क्या हुआ, फिर काली की देह में स्थित
क्या रहा और निर्वाण को प्राप्त हुआ जगत् पुनः आकर नाचने कैसे लगा ? अर्थात् जब जगत्
नष्ट हो गया, तो फिर वह स्थित कैसे रहा और जब वह निर्वाण को प्राप्त हो गया तब पुनः
आकर वह नाचने कैसे लगा, यह सब कहना विरुद्ध प्रतीत हो रहा है