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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 82, Verse 3

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 82, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 82 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । नासौ पुमान्न चासौ स्त्री न तन्नृत्तं न तावुभौ । तथाभूते तथाचारे आकृती न च ते तयोः ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

उसने नृत्य ही किया है । सच कहना तो यह है कि भगवती काली ओर भगवान्‌ रुद्र-ये दोनों ही, जैसा कि मैंने आपसे उनका वर्णन किया है वैसे नहीं थे, वस्तुतः उस आचार के भी वे नहीं थे ओर न उनकी वह आकृति ही कुछ थी