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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 82, Verses 19–20

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 82, verses 19–20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 82 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

एतत्सर्वं च विमलं खमेवात्र न संशयः । अस्मादनन्यत्स्वप्नादिर्दृष्टान्तोऽत्राविखण्डितः ॥ १९ ॥ चिन्मयः परमाकाशो य एव कथितो मया । एषोऽसौ शिव इत्युक्तो भवत्येष सनातनः ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

इसमें तनिक भी सन्देह नहीं कि यह सब कुछ निर्मल चिदाकाश ही स्थित है इससे भिन्न कुछ नहीं है । इस विषय में स्वप्नादि ही अविखण्डित दृष्टान्त है