Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 8, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 8, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 8 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
रन्धनाज्जयमाप्नोति स्वशास्त्रे सूपकृत्कृते ।
विवेकी स्वविवेकित्वं यतनादेव नान्यथा ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे पाचक अपने पाक शास्त्र का भलीभाँति अभ्यास कर लेने पर उस पाक शास्त्र में वर्णित
विधि से ही नाना प्रकार के भक्ष्य-भोज्य पदार्थों एवं नाना तरह के रसायनों का पाक बनाने से क्षुधा,
तृष्णा, रोग, जरा आदि के ऊपर विजय प्राप्त करता है वैसे ही विवेकी पुरुष गुरु-शास्त्रोक्त मार्ग
से अपने प्रयत्न द्वारा ही कैवल्यपद को प्राप्त करता है, दूसरी रीति से नहीं