Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 8, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 8, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 8 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
समाकर्ण्य गुरोर्वाक्यं यतन्ते ये स्वयत्नतः ।
संकल्पत्यागमामूलं पदप्राप्तौ जयन्ति ते ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
यह सार तीनों काल में वस्तुतः हैं ही नहीं; इस पर्वोक्त अर्थ को दढ करने के लिए
स्रंकल्पक्यूतमण्डप का आये चलकर वर्णन करने की इच्छा कर रहे भ्रुशुण्डजी महाराज पहले
भूमिका बधते हैं /
आगे चलकर वर्णित होनेवाले तथा पूर्व में वर्णित हो चुके मूलसहित संकल्प का त्याग करने के
लिए उसका उपायक्रम बतलानेवाले गुरु के वाक्य सुन उस गुरु द्वारा कहे गये क्रम से जो अपने प्रयत्न
द्वारा स्वयं यत्न करते हैं वे तत्त्वज्ञानप्राप्ति के बाद संकल्परहित कैवल्यनामक परमपद को जीत लेते
हैं