Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 79, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 79, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 79 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
पिशाचोऽस्तीति चेत्संवित्सत्यार्था तेन संविदः ।
मृतस्यास्ति परो लोक इत्यस्यां किं न सत्यता ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
सर्वजन प्रसिद्ध ज्ञानो का स्वतः प्रामाण्य होने से "पिशाच है" यदि
यह संवित् सत्यार्थ है, तो फिर मृत प्राणी का भी परलोक है यानी कोई-न-कोई दूसरा लोक
अवश्य है, यह श्रुतिजन्य प्रतीति भला सत्य क्यों न सिद्ध होगी, (क्योकि जो युक्ति दम उपस्थित
कर रहे हो उरी युक्ति के बल से हम मृत प्राणी के परलोक का अस्तित्व सिद्ध कर रहे हैं / हमें
युक्त ढूँढ़ने के लिए कहीं और जगह जाने की आवश्यकता नहीं है)