Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 77 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
घनसीकृतबाष्पाभ्रैः कल्पाभ्रैरपि मेदुरैः ।
अन्धीकृतार्कजालांशुतमोनिविडमन्थरम् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
घने जल कणों से युक्त वाष्प के मेघों से तथा
कल्पकालीन नीलवर्णं के मेघो से सारी त्रिलोकी में सूर्यो के किरण समूह आवृत हो गये थे, इससे
सर्वत्र अन्धकार ही अन्धकार हो गया था