Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 77 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
आवहोत्थजलाद्रीन्द्रसंघट्टास्फोटघट्टितम् ।
महाप्रलयपर्यस्तपर्वतप्रान्तकुट्टिमम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, सारे त्रैलोक्य मे उस समय चारों ओर बहनेवाले प्रचण्ड पवन के कारण उत्पन्न हुए
जल के पर्वताकार बड़े-बड़े तरंगों के आघातों से पर्वत टूट-फूट जा रहे थे ओर पर्वत प्रान्तों को
कूट-कूटकर पवन प्रलय में ले जा रहा था