Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 77 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
विशीर्णवसुधापीठखण्डखण्डैर्गलत्तटैः ।
उह्यमानैर्लुठच्छैलपतनैः संकटार्णवम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामभद्र, पर्वतो का आधारषीठ जो भूतल था
वह तो एकदम जीर्ण -शीर्णं होकर खण्ड-खण्ड हो चुका था - इस स्थिति से लुढक रहे पर्वतो के
पतनों से त्रिलोकी में सारे समुद्र महान् संकट में फंसे से मालूम हो रहे थे