Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 76, Verse 31
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 76, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 76 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
हेमसंभाररूपेण हिमालयमिवाखिलम् ।
जाड्यस्तम्भितनिःशेषजलकाष्ठाचलं दधत् ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
सुवर्ण के समूह के सदृश विद्युत-समूहों का रूप धर लेने के कारण वह उस हिमालय का मानों
स्वरूप धारण कर रहा था, जिस हिमालय ने अपनी जडता के कारण काष्ठ के सदृश समस्त जल
को अचल रूप से स्तम्भित कर दिया है