Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 76, Verse 30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 76, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 76 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
मृतो दग्धो निशानाथस्ततो द्विगुणशीतलः ।
अन्यमाकारमाश्रित्य परं लोकमिवागतः ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
उसे देखकर यह भी मालूम पड़ रहा था कि मृत या दग्ध चन्द्रमा ही परलोक में जाकर
पुनः पहले की अपेक्षा द्विगुण शीतल होकर दूसरा रूप लेकर इस आकाशमण्डल में आया है