Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 76, Verse 32
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 76, verse 32 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 76 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
अथ ब्रह्माण्डविस्फोटकठिनं घटिताम्बरम् ।
प्राग्द्रुतोद्भटतौषारकाष्ठा वृष्टिः पपात ह ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, तदनन्तर वर्षा होने लगी, इसने समस्त
आकाशमण्डल को ब्रह्माण्ड के विस्फोट के सदृश अतिकटठोर वजतुल्य निर्घत से छा दिया । इसने
तो अखिल दिग्मण्डल को पहले से ही तुषार से व्याप्त कर दिया था