Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 76, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 76, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 76 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
कल्पान्तक्षुभिताम्भोधिर्वर्तुलावर्तवृत्तिमान् ।
तडिज्जलचरः सारनिर्ह्रादः खमिवागतः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
उस मेघ को देखकर यही कहना पड़ता था कि कल्पान्त से क्षुब्ध होकर समुद्र ही
आकाश में आ धमका है । क्योंकि उसमें वर्तुलाकार द्वादश आदित्यों की परिधि ही उसका वेष्टन-
सा था, बिजली ही उसमें जलचर-सी मालूम पड़ती थी और उसमें भी गम्भीर ध्वनि हो रही
थी