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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 76, Verse 28

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 76, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 76 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

भित्तिभासुरनीहारभारनिर्वारदिक्तटः । ब्रह्माण्डकुड्यनिविडमण्डलास्फोटपण्डितः ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

समस्त दिशाओं के तट भासुर नीहारसमुहों से छिद्ररहित भित्तियों के सदुश मालूम पड़ रहे थे, वह समस्त ब्रह्माण्ड की भित्तियों के घनमण्डलों को तोड़-फोड़ देने मेँ अतिदक्ष मालुम हो रहा था (अथवा दीवार के समान दकार समूहों से दिशाओं को पूर्ण करनेवाला और ब्रह्माड के अतप्यन्त श्रुतल को विदीर्ण करने में दक्ष वह मेघमडल था //