Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 74, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 74, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 74 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
यत्र त्वमपि देहान्तः कर्तुं शक्तोऽस्यलं स्थितम् ।
संकल्पात्मा विभुस्तत्र ब्रह्मा किं न करिष्यति ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
कैमुतिक न्याय से अपने शरीर के अन्दर विधाता की स्थिति बतलाते हैं /
जबकि आप भी अपने स्थूल शरीर के भीतर अपनी स्थिति भलीभाँति कर सकते हैं, तब भला
सर्वसमर्थ संकल्पात्मा ब्रह्मदेव अपनी स्थिति क्यों नहीं कर सकते ?