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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 74, Verse 28

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 74, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 74 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

नृणां तथा च मुख्यानां जीवो ब्रह्मपुरोदरे । उत्पत्तिपुत्रिकादेहः प्रतिबिम्बोपमोऽस्ति सः ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

स्थूल वेहात्मक अपने हृदयकमल में लिंग देहात्सक अपनी अवस्थिति सी विवेकियों को अनुभव प्रिद्ध है, यह कहते हैं । विवेकी पुरुषों का जीव अपने स्थूल शरीर के भीतर हृदयकमल में अवस्थित रहता है । वह सबकी देह उत्पन्न हुई प्रतिमा-जैसी है, यही कारण है कि दर्पण के अन्तर्गत प्रतिबिम्ब के सदृश वे ब्रह्माजी हैं