Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 74, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 74, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 74 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
परमं यच्चिदाकाशं तद्विराडात्मनो वपुः ।
आद्यन्तमध्यरहितं लघु त्वस्य वपुर्जगत् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
उम्र विराट् का ब्रह्म ही वास्तविक स्वरूप प्राथमिक और अकल्पित हैं / उस विराट का शरीर
तो उम्की द्रष्ट से अत्यन्त ही लघुतर ह, यह कहते हैं ।
आदि, अन्त और मध्य से रहित जो परम चिदाकाश है, वही विराटात्मा का प्रथम कल्पनारहित
शरीर है तथा उसका कल्पित यह जगद्रूप शरीर तो अत्यन्त ही लघु है