Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 74, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 74, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 74 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
संकल्परहितो ब्रह्मा स्वाण्डं संकल्पनात्मकम् ।
वपुषः परितो भास्वत्पश्यत्याकाशमेव तत् ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
आदि, मध्य ओर अन्त से राहित चिदाकाश ही उका स्वरुप है, यह आप कैसे जानते हैं. इस
पर कहते हैं /
चूँकि वह ब्रह्मा अपने संकल्पित ब्रह्माण्ड-शरीर से बाहर संकल्पित होकर यानी संकल्प-शून्य
साक्षी चिदाकाशमात्र होकर संकल्पनात्मक अपने अण्ड को चारों तरफ देखता है । वास्तव में तो वह
ब्रह्माण्ड भी प्रकाशमय चिदाकाशरूप ही है