Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 73 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
अन्यस्मिन्नेकदेशे सा ऊर्ध्वाभिख्यां करिष्यति ।
एवं दिगभिधानादि कल्पयिष्यति स क्रमात् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
वही
चितिरूप जीव दूसरे देश-काल में ज्ञान होने पर उनका “उर्ध्व नाम रख लेगा, इसी प्रकार दिशा
में पूर्व, पश्चिम, उत्तर आदि नामों की वह क्रमशः कल्पना कर लेगा