Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 73 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
देशकालक्रियाद्रव्यशब्दानामर्थवेदनम् ।
भविष्यति स्वयमसावाकाशविशदोऽपि सन् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
इस तरह देश, काल और वर्चुओं की एवं उनके नामो की कल्पना बतलाई गु अब जिन्हे
शब्दशकित का ज्ञान हैं, ऐसे पुरुषों को शब्दश्रवण होने पर तत्-तद् अर्थो का जो विज्ञान होगा,
उम्र विज्ञान के रुप में भी वह आत्मा ही हो जायेगा, यह कहते हैं /
भद्र, तदनन्तर यद्यपि आकाश के सदुश अतिनिर्मल ही यह आत्मा है, तथापि संकल्पवश यह
आत्मा ही स्वयं देश, काल, क्रिया, द्रव्य आदि शब्दों के अर्थ के ज्ञान के रूप में हो जायेगा