Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 37
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, verse 37 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
प्रलुण्ठितवनव्यूहलूनकाननिताम्बराः ।
सपक्षपर्वताकारतरङ्गापूरिताम्बराः ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
पहले तो इन्होंने वनसमूहों को उखाड़ फेंका, फिर उनको ऊपर उठाया, इससे
आकाशमण्डल ऐसा प्रतीत होने लगा, मानों उसका जंगल काट दिया गया हो । तथा उसे पंखयुक्त
पर्वतमालाओं के सदृश अपनी तरंगमालाओं से ठसाठस भर दिया