Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 38
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, verse 38 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
महारवमरुच्छिन्नकल्लोलाचलचालिताः ।
चञ्चत्तीरगिरिव्रातपतत्तटरटज्जलाः ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
भयंकर शब्द करनेवाले
प्रचण्ड वायुओं ने तरंगो को विभक्त कर देने के कारण पर्वतां के सदृश समस्त समुद्रों को विचलित
कर दिया था तथा रत्नों के प्रकाश से चमकीले तीरस्थ पर्वतों के गिरने के कारण गिर रहे तटों से
उनका जल भीषण ध्वनि कर रहा था