Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 36
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, verse 36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
भूपाः परपुराक्रान्ता लग्ना इव हतारयः ।
तारारवरणद्गेहविद्रावितनभश्चराः ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
सम्पूर्ण
समूद्रों की गतियाँ कुछ विचित्र ही हो गई, वे शत्रुओं के नगरों पर आक्रमण करनेवाले नष्टशत्रु राजाओं
के सदृश मालूम पड़ने लग गये, क्योकि इन्होंने भी अपनी उन्नत तरगों से विरोधी दावाग्नि को आहतकर
ऊँचे स्वर से अपने-अपने घरों से देवताओं को भगा दिया ओर उनके नगरों पर मानों अपना अधिकार
कर लिया