Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 65, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 65, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 65 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
अर्जयित्वा तथा व्योम्नि गतिं धारणया मया ।
अभ्यस्ता धारणा भूयः सिद्धसङ्गफलप्रदा ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
उस प्रकार धारणा से मैंने आकाश में गमन करने की सामथ्य प्राप्त
कर फिर मैंने सिद्धों के साथ संवादफल देनेवाली धारणा का अभ्यास किया । इसीसे रिद्धों
के एकान्त स्थान में आकर आपके साथ संवाद कर रही हूँ