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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 65, Verse 19

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 65, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 65 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

ततः स्वजगदाधारपूर्वापरनिरीक्षया । स्थिताहं धारणां बद्ध्वा सापि सिद्धिं समागता ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

उसके बाद मैंने अपने वासस्थानभूत ब्रह्माण्ड के पूर्वापर घटित आकार को शास्त्र और योगदृष्टि से देखने के निमित्त तदाकार (अपने वासस्थानभूत ब्रह्माण्डाकार) भावनारूप धारणा बोधकर स्थित हुई और वह धारणा भी मुझे सिद्ध हो गई