Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
अन्ते तस्या भुवः शैलो लोकालोकोऽस्ति विश्रुतः ।
भूपीठस्य प्रकोष्ठस्य वलयावलनां दधत् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
उस मही के अन्त में (बाहरी
प्रान्त में एक लोकालोक नामका अत्यन्त विख्यात पर्वत है । जगत् लक्ष्मी के उन्नत करमूलभूत
इस भूपीठ को उसने कंकण के सदृश चारों ओर से घेर दिया है