Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, Verse 11

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 64, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 64 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

क्वचिन्नित्यं तमोव्याप्तो मूढबुद्धेरिवाशयः । क्वचिन्नित्यं प्रकाशात्मा मनः सत्त्ववतामिव ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

अब उस पर्वत का वर्णन करती हैं / भगवन्‌, यह पर्वत कहीं पर तो मूढ़मति पुरुषों के अन्तःकरण के सदृश सदा अन्धकार से व्याप्त है ओर कहीं पर तो सात्विक पुरुषों के अन्तःकरण के सदृश सदा प्रकाशमय है