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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 63, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 63, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 63 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । भगवन्स्वप्न एवेदं कथं जाग्रदवस्थितम् । असत्यमेव सत्यत्वमिव यातं कथं भवेत् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

प्रमाणमस्य जयव्प्रपंच की तुलना प्रमाणयम्य स्वप्न से करना अयुक्त हैं, यह श्री रामचन्द्रणी आशंका करते हैं / श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे भगवन्‌, स्वप्नरूप ही यह जगत्‌ जाग्रतस्वरूप कैसे अवस्थित है तथा असत्य ही यह सत्य-सा कैसे हो गया, यह कैसे संभव है ?