Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 62, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 62, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 62 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
प्रमाणमत्र ते स्वप्नदृष्टोऽभुवनविभ्रमः ।
स्वप्नेऽनुभूयते दृश्यं न च किंचित्खमेव तत् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त अर्थ में स्वाप्निक जयत् के तरह के रूप को प्रमाण रुप से उपस्थित करते हैं /
हे श्रीरामचन्द्रजी, इस विषय में आपको प्रमाण तो स्वप्न में देखा गया भुवनविभ्रम ही है,
क्योकि स्वप्न में जो दृश्य अनुभूत होता है वह चिदाकाश ही है, उसके सिवा और कुछ नहीं