Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 61, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 61, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 61 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
यदि शंका हो कि ब्रह्मरूप विश्व है, तब तो ब्रह्म भी अनेक तरह का होना चाहिए, क्योकि
विश्व अनेक तरह का है तो उतर शका पर कहते हैं /
महाप्रलय आदि भी उस महाकालरूप परमात्मा के कल्पित अवयव ही हैं, इसलिए विश्व की
अनेकता से ब्रह्म में, अनेकता नहीं आ सकती, जैसे कि तरगों की अनेकता से जल में