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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 61, Verse 11

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 61, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 61 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

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हिन्दी अर्थ

जयत्‌ की आत्मा भी अविनाशी आत्मा को लेकर ही है इससे भी जग्रत्‌ विनश्वर नहीं है, यह कहते हैं / हे श्रीरामचन्द्रजी, यह आप जान लीजिए कि जो जो पदार्थ जिस जिस वस्तु के स्वरूपभूत हैं, वे उस उस वस्तु के विनाश के बिना विनष्ट नहीं हो सकते, इस नियम के आधार पर ब्रह्मरूप दृश्य ब्रह्म के सदुश अविनाशी ही है, क्योकि ब्रह्मस्वरूप जगत्‌ का विनाश तभी होगा जब ब्रह्मविनाश होगा, परन्तु ब्रह्म तो शाश्वत है, इसलिए जगत्‌ नष्ट नहीं हो सकता