Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
त्वं किंचिदिति चेद्वक्षि तत्र किं चिदिवाङ्ग चित् ।
सा हि शून्यतमा व्योम्नो न च नाम न किंचन ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
किस प्रकार के तर्क से किस प्रकार करा उदय है ओर किस तरह का क्षय ढै इसका
उदाहरण देते हैं।
हे श्रीरामजी, यदि आप किसी भी दशा में किसी रूप की कल्पनाकर नाम से यह कहते
हैं कि यह घट है, यह पट है, तो उस दशा में आपके द्वारा प्रयुक्त तत्-तत् नामरूप से युक्त
चिति ही हो जाती है, यही उदय है । यही चिति आकाश से भी शून्यतम जब विवक्षित होती
है, तब किसी नाम या रूप से युक्त नहीं होतीह़यही उसका विनाश है