Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 60, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 60 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
चिति सर्वं चितः सर्वं चित्सर्वं सर्वतश्च चित् ।
चित्सत्सर्वात्मिकेत्येतद्दृष्टं तत्र मयाखिलम् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
अस्तु, कल्पना से ही उदय और अस्त है, इससे प्रक्रत में क्या आया, इस पर कहते हैं /
श्रीरामजी, सब कुछ चेतन में ही है, सब कुछ चेतन ही है, चेतन ही सब कुछ है, चारों ओर से
चेतन ही चेतन है, चेतन ही सत् है , सर्वात्मक भी चेतन ही है ह यही मैंने अन्वय - व्यतिरेक से
परीक्षाकर वहाँ देखा